सुलतानपुर/अमेठी। हाईकोर्ट से रामगंज पुलिस को लगा बड़ा झटका। हाईकोर्ट ने एसओ अजयेंद्र कुमार के जरिये आनन-फानन में दर्ज कराई गई गैंगस्टर एफआईआर रद्द करने का दिया आदेश। जस्टिस बृजराज सिंह व विवेक चौधरी की बेंच ने सम्बंधित अधिकारियों की कार्यवाही को माना महज दिखावटी कोरम। गैंग-चार्ट के साथ संलग्न दस्तावेजो को बिना देखे छपे-छपाये प्रारूप पर उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर -मुहर कराकर स्वीकृति प्राप्त करने का मामला आया सामने। हाईकोर्ट ने मिली खामियों के आधार पर थाना रामगंज में दर्ज गैंगस्टर की एफआईआर रद्द करने का दिया आदेश। हाईकोर्ट ने जरूरत के अनुसार बने नियमो का पालन करते हुए नई कार्यवाही की दी है स्वतंत्रता। हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश से जिम्मेदार अफसरों की कार्यशैली पर उठा सवाल।थाना प्रभारी रामगंज अजयेन्द्र कुमार के जरिये सभी दस्तावेजों को बिना अच्छे से देखे-समझे एफआईआर दर्ज कराकर हाईकोर्ट में किरकिरी कराने की बात पर उच्चाधिकारी उनके फेलियर पर ले सकते है संज्ञान,अनुभवहीनता की बात आ रही सामने। अमेठी जिला स्थित रामगंज थाने में थाना प्रभारी अजयेंद्र कुमार ने बीते 12 फरवरी को दर्ज कराई थी गैंगस्टर की एफआईआर। एसओ ने आरोपी आदित्य सिंह निवासी कुंडा कुँअर छावनी रामगंज-अमेठी को गैंग लीडर व विशेष पाण्डेय निवासी विनोवापुरी-सुलतानपुर,सचिन अग्रहरि व आर्यन शर्मा निवासीगण-कूरेभार सुल्तानपुर व याची अभय यादव को गैंग मेम्बर बताते हुए दर्ज कराई थी गैंगस्टर की एफआईआर। मिली जानकारी के मुताबिक बीते 19 सितम्बर को रामगंज बाजार के व्यवसायी खेमन अग्रहरि ने दर्ज कराया आरोपियो पर लूट का मुकदमा। मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस की कमजोर थ्योरी के चलते आरोपियो को जल्द मिल गई थी जमानत,नतीजतन उन पर शिकंजा कसने के लिए एसओ ने आरोपियो पर दर्ज कराई थी गैंगस्टर की एफआईआर।मिली जानकारी के मुताबिक एसओ ने एसपी के अनुमोदन के बाद बीते 10 फरवरी की तारीख में जिलाधिकारी अमेठी की दिखाई है स्वीकृति और उसी के एक दिन बाद अपने थाने में दर्ज कराया है मुकदमा। याची के अधिवक्ता ने पुलिस के जरिये पेश किये गये डीएम व एसपी अमेठी की स्वीकृति सम्बंधित पृष्ठ पर उठाया सवाल। सामने आये तथ्यों के मुताबिक कुल पांच पृष्ठों पर तैयार की गई है गैंग-चार्ट,पांचवे यानी अंतिम पृष्ठ पर पर्याप्त जगह होने के बावजूद अनुमोदन के लिए उच्चाधिकारियों के हस्ताक्षर-मुहर होने के बजाय अलग पृष्ठ पर यानी छपे-छपाये प्रारूप पर कागजी कोरम कराने का मामला आ रहा सामने। हाईकोर्ट ने सरकार पक्ष के वकील व याची पक्ष से उपलब्ध कराये अभिलेखों के आधार पर माना कि ऐसा नहीं लगता कि अफसरों के जरिये अभिलेखों को ठीक से देखने के बाद प्रदान की गई है स्वीकृति। हाईकोर्ट ने गैंगचार्ट स्वीकृति को लेकर दिखी खामियों पर संज्ञान लेते हुए रद्द की एफआईआर।मिली जानकारी के मुताबिक मामले में याची अभय यादव के अलावा आर्यन शर्मा ने भी ली है हाईकोर्ट की शरण। आरोपी आर्यन शर्मा की याचिका अभी बताई जा रही लम्बित। वहीं मिली जानकारी के मुताबिक रद्द हुई एफआईआर से जुड़े मुकदमे में पहले ही जेल जा चुके आरोपी सचिन अग्रहरि की जमानत बीते छह मार्च को स्पेशल जज गैंगस्टर कोर्ट- संतोष कुमार के जरिये की जा चुकी है खारिज। मिली जानकारी के मुताबिक सचिन अग्रहरि की जमानत अर्जी रामगंज थाने के बजाय पीपरपुर थाने के नाम से बताई जा रही खारिज,फिलहाल इसे मानी जा रही लिपकीय त्रुटि। वहीं आरोपी विशेष पाण्डेय की भी गैंगस्टर कोर्ट में पेंडिंग बताई जा रही जमानत अर्जी,जबकि गैंग लीडर बताए गये आदित्य सिंह की नहीं मिल पा रही जानकारी। हाईकोर्ट के आदेश से पुलिस को लगा बड़ा झटका और आरोपियो को मिली राहत। आरोपियो के प्रति होने वाली लिखा-पढ़ी की कार्यवाही में एसओ ने समय पर डाली होती नजर तो शायद हाईकोर्ट में सरकार पक्ष की न होती किरकिरी,गैर अनुभवी पुलिस अफसरों की तैनाती से राम-भरोसे चल रहे थाने। हाईकोर्ट ने एजीए को एफआईआर रद्द किये जाने सम्बन्धी आदेश से सम्बंधित अफसरों को सूचित कराने का दिया है निर्देश,मामले में जिम्मेदारो पर इस फेलियर के चलते गिर सकती है गाज।
सोर्स-अंकुश यादव