पेड़ कटान परमिट में घोटाला! ठेकेदारों को मिला पुलिस का संरक्षण, हरियाली पर हमला

पेड़ कटान परमिट में घोटाला! ठेकेदारों को मिला पुलिस का संरक्षण, हरियाली पर हमला।

अमेठी के जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे पेड़ों की कटान का गोरखधंधा पुलिस, वन विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से खुलेआम चल रहा है। नियमों को ताक पर रखकर हरियाली पर आरा चलाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अंजान बने हुए हैं।
ताज़ा मामला गौहर के पुरवा का है, जहां ठेकेदार द्वारा 7 गुलर के पेड़ काटे जा रहे थे, लेकिन कागजों में इन्हें केवल 3 पेड़ दर्शाया गया। यदि वन विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाती तो सरकार को लगभग 70 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त होता, लेकिन मिलीभगत के चलते यह रकम सरकारी खजाने में पहुंचने से पहले ही गायब हो गई।
सूचना मिलने पर जिला वन अधिकारी ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन मौके पर पहुंचे वन दरोगा पंकज कुमार ने जुर्माना करने के बजाय ठेकेदार को FIR दर्ज कराने की सलाह दे दी। इसके बाद ठेकेदार ने जगदीशपुर पुलिस से संपर्क कर औपचारिक FIR करा दी, जिससे भारी जुर्माने से बचाव हो गया। यही नहीं, इसी ठेकेदार द्वारा इससे पहले गांव में आम के पेड़ की कटान पर जुर्माना किया जा चुका है, इसके बावजूद दोबारा कार्रवाई से साफ है कि संरक्षण किस स्तर पर दिया जा रहा है।गौहर का पुरवा, प्रेमगढ़, गडरियाडीह, मुजाहिदखानी सहित दर्जनों गांवों में प्रतिदिन प्रतिबंधित पेड़ों की कटान हो रही है। यह सब उस समय हो रहा है जब पुलिस कप्तान अर्पणा रजत कौशिक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटान किसी भी हालत में न हो।
इस पूरे मामले पर वन दरोगा पंकज कुमार और विवेचक वीरेंद्र मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
क्षेत्र में लगातार हो रही पेड़ कटान से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और प्रशासन की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।