कुण्डा का मान जननायक मा. श्री राजा भइया जी का स्वाभिमान !!

कुण्डा की इस पवित्र धरती ने न जाने कितने वीरों को जन्म दिया,पर आज भी जब कोई नाम शौर्य,सेवा और स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में लिया जाता है तो लबों पर बस एक ही नाम आता है जननायक महाराजा कुँवर रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया जी,ये वो शख्सियत हैं जो सत्ता से नहीं जनता के दिलों पे राज करते है इतिहास के पन्ने गवाह हैं कभी कल्याण सिंह उतरे मैदान में कभी मायावती ने साज़िशों के तीर चलाए कभी मुलायम ने विरोध का बिगुल फूंका तो कभी अखिलेश ने अपनी ताकत झोंक दी मगर जननायक मा. श्री राजा भइया जी ने कभी किसी “चेहरे” को मंच पर बुलाना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि उनका सबसे बड़ा चेहरा सबसे बड़ी ताक़त सबसे बड़ा सम्मान कुण्डा की सम्मानित जनता है! ये कुण्डा की मिट्टी है दोस्तों,जहाँ हर घर में स्वाभिमान पलता है,हर दिल में जननायक मा. श्री राजा भइया जी बसते हैं ये रिश्ता राजनीति का नहीं,

संस्कार और समर्पण का रिश्ता है जननायक मा. श्री राजा भइया जी ने कभी सत्ता की भीख नहीं माँगी,उन्होंने जनता के सम्मान, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई जनता के साथ खड़े होकर लड़ी है और जब जनता का आशीर्वाद ढाल बन जाए,तो फिर कोई साज़िश,कोई शोर,कोई लहर भी जननायक जी को रोक नहीं सकती। आज भी वही ललकार है, वही शपथ है —

 

“हम सत्ता की दहलीज़ पर नहीं झुकते,

हम जनता के रास्ते पर चलते हैं!”

 

अब कुछ लोग हैं जो आज भी “हथियार… हथियार…” चिल्ला कर,विलाप की धुन में अफ़वाहों का नगाड़ा बजा रहे हैं,उन्हें यह याद रखना चाहिए,

जननायक मा. श्री राजा भइया जी और कुण्डा की सम्मानित जनता एक-दूसरे के पूरक हैं,जैसे सूर्य को उसकी किरणों से अलग नहीं किया जा सकता,वैसे ही कुण्डा की आत्मा से जननायक मा. श्री राजा भइया जी को कोई अलग नहीं कर सकता ये केवल एक नेता की कहानी नहीं,

ये कुण्डा की अस्मिता,स्वाभिमान और जनता के अदम्य विश्वास की गाथा है!