मेहनत सफलता की मोहताज नहीं होती,पहले ही प्रयास में पाई मंजिल, अब आईपीएस हैं अपर्णा कौशिक

18 लाख की नौकरी छोड़ IPS बनीं अपर्णा रजत कौशिक 

 

अमेठी. ये प्रेरणादायी कहानी है यूपी के रामपुर की रहने वाली आईपीएस अपर्णा रजत कौशिक की. अपर्णा रजत कौशिक 2015 बैच की IPS अधिकारी हैं. फिलहाल यूपी के अमेठी की SP हैं. इससे पहले वह कासगंज और औरैया जिले की कमान संभाल चुकी हैं. पुलिस सेवा में आने से पहले अपर्णा कौशिक प्राइवेट सेक्टर में जॉब करती थीं. उन्होंने 18 लाख के पैकेज की बिजनेस एनालिसेस की जॉब छोड़कर सिविल सर्विस को चुना और सफलता भी पाई.1991 में जन्मी अपर्णा कौशिक अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां प्रीति गौतम को देती हैं.पिता रणवीर सिंह गौतम सब-रजिस्ट्रार थे लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि उनके जन्म से पहले ही पिता का निधन हो गया. ऐसे में मां ने ही मां और पिता दोनों का फर्ज बखूबी निभाया. जीवन से संघर्ष करना सिखया.अपर्णा की प्राइमरी शिक्षा रामपुर से हुई. 2006 में हाईस्कूल में स्टेट की टॉपर रहीं. हाईस्कूल के बाद जयपुर चली गईं. 2008 में सेंट जेजियस स्कूल से फर्स्ट डिवीजन से 12वीं पास करने के बाद NIT प्रयागराज से बीटेक की पढ़ाई की. 2012 में बीटेक कंप्लीट करते ही कैंपस प्लेसमेंट से अच्छी जॉब मिल गई. 2012 में 18 लाख रुपये सालाना पैकेज पर गुरुग्राम में बिजनेस एनालिटिक्स के पोस्ट पर जॉब मिली.

ऐसे पाई अपनी मंजिल
आईपीएस अपर्णा कौशिक ने बताया, ‘मेरी कॉर्पोरेट जॉब में मुझे कोई परेशानी नहीं थी. ऑफिस की गाड़ी घर लेने आती थी और घर तक छोड़ जाती थी लेकिन मेरा सपना जनता की सेवा थी. दरअसल, बीटेक की पढ़ाई के दौरान ही सिविल सर्विस में जाने का मन बना लिया था इसलिए गुरुग्राम में ही नौकरी के दौरान UPSC की तैयारी शुरू कर दी. नौकरी के साथ-साथ सेल्फ स्टडी की. अपने टारगेट पर फोकस किया और पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लियर कर लिया. फिर इंटरव्यू भी अच्छे हुआ. अंत में सफलता मिल ही गई.’

साधारण तरीके से की शादी
अमेठी एसपी अपर्णा ने बताया, ‘उत्तराखंड कल्चर और वहां के रहन-सहन के अनुसार हिंदू रीति रिवाज के साथ हमारी शादी 2018 में हुई. शादी में सभी अरेंजमेंट वहां के लोकल लोगों ने ही अपने हिसाब से किया था. हमारी शादी बहुत ही साधारण तरीके से हुई. हमारी शादी में जो पैसा बचाया गया उसे महिला सहायता समूह को लोगों की मदद के लिए दिया गया. मै यही मैसेज देना चाहती हूं कि शादी में फिजूल खर्च न करें।